बुधवार, 23 जून 2010

मेरे कमली वाले की शान ही निराली है - अल मदीना, चल मदीना



बशर हो कर भी वह (NABI – SAW) बशर नहीं
उनकी उम्मत को इसकी खबर नहीं
बशर अगर वह होते तो ऐसा न होता
कंकरों ने भी कलमा पढ़ा न होता

बशर हो कर भी वह (NABI – SAW) बशर नहीं
उनकी उम्मत को इसकी खबर नहीं
बशर अगर वह होते तो ऐसा न होता
क़मर (चाँद) के दो टुकड़े किया न होता

बशर हो कर भी वह (NABI – SAW) बशर नहीं
उनकी उम्मत को इसकी खबर नहीं
बशर अगर वह होते तो ऐसा न होता
शम्स (सूरज) का वक़्त बदला न होता

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